AYURVEDA SAR SANGHRA BOOK HINDI

AYURVEDA SAR SANGHRA

AYURVEDA SAR SANGHRA

AYURVEDA SAR SANGHRA by BAIDYANATH BOOK IN HINDI is very very important not only book but an Ayurveda Granth. this is a book of Ayurveda 

if you want to buy this you can buy this from this Amazon link

 

Product details

  • ASIN: B0768HL7FH
  • Publisher: SRI BAIDYANATH AYURVEDA BHAVAN; Present Edition (1 January 2017); Kitab mahal Darya ganj New Delhi -110002 Contact – 9871554029
  • Language : Hindi
  • Paperback : 832 pages
  • Item Weight : 490 kg
  • Dimensions : 21 x 13 x 3 cm

AYURVEDA SAR SANGHRA BOOK HINDI

This is a Hindi book only and now available in Pfd form one can only purchase this from amazon

Also read this article – Ayurvedic-product-shilajit-baidyanath

Ayurvedic Product-shilajit baidyanath

My youtube channel – https://www.youtube.com/subhashchaudhary?sub_confirmation=1

 

 

जामुन के बारे में विशेष जानकारी

plum, fruit, red plum

जामुन के बारे में विशेष जानकारी

plum, fruit, food

भारत को जम्बू द्वीप के नाम से भी जाना जाता है और यह नाम जामुन के वजह से है।आश्चर्य की बात तो है कि किसी फल के वजह से किसी देश का नामकरण किया गया !

दरअसल जामुन के कई नाम है और उन्हीं में से एक नाम है जम्बू । भारत में जामुन की बहुतायत रही है । हमारे देश में इसकी पेड़ों की संख्या लाखों-करोड़ों में है और शायद इसी कारण से यह फल हमारे देश का पहचान बन गया।

भारतीय माइथोलॉजी के दो प्रमुख केंद्र रामायण और महाभारत में भी यह विशेष पात्र रहा है।भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में मुख्य रूप से जामुन का ही सेवन किया था वहीं श्री कृष्णा के शरीर के रंग को ही जामुनी कहा गया है। संस्कृत के श्लोकों में अक्सर इस नाम का उच्चारण आता है।

जामुन विशुद्ध रूप से भारतीय फल है।भारत का हर गली – मोहल्ला ईसके स्वाद से परीचित हैं। जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है. जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है।

जामुन खाने के फायदे:

plum, fruit, red plum

पाचन क्रिया के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है. जामुन खाने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं

मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन एक रामबाण उपाय है. जामुन के बीज सुखाकर पीस लें. इस पाउडर को खाने से मधुमेह में काफी फायदा होता है

मधुमेह के अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाव में कारगर होते हैं. इसके अलावा पथरी की रोकथाम में भी जामुन खाना फायदेमंद होता है. इसके बीज को बारीक पीसकर पानी या दही के साथ लेना चाहिए

अगर किसी को दस्त हो रहे जामुन को सेंधा नमक के साथ खाना फायदेमंद रहता है. खूनी दस्त होने पर भी जामुन के बीज बहुत फायदेमंद साबित होते हैं

दांत और मसूड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में जामुन विशेषतौर पर फायदेमंद होता है. इसके बीज को पीस लीजिए. इससे मंजन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं

यह पाचनतंत्र को तंदुरुस्त रखता हैं । साथ ही दांत और मसूड़े के लिए बेहद फायदेमंद है ।

जामुन में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम होता है।आयुर्वेद में जामुन को खाने के बाद खाने की सलाह दी जाती है।

जामुन के लकड़ी का भी कोई जबाव नहीं है। एक बेहतरीन इमारती लकड़ी होने के साथ ईसके पानी मे टिके रहने की बाकमाल शक्ति है‌। अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल या हरी काई नहीं जमती सो टंकी को लम्बे समय तक साफ़ नहीं करना पड़ता |प्राचीन समय में जल स्रोतों के किनारे जामुन की बहुतायत होने की यही कारण था इसके पत्ते में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि पानी को हमेशा साफ रखते हैं। कुए के किनारे अक्सर जामुन के पेड़ लगाए जाते थे।

जामुन की एक खासियत है कि इसकी लकड़ी पानी में काफी समय तक सड़ता नही है। जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़े पैमाने पर होता है।

जामुन औषधीय गुणों का भण्डार होने के साथ ही किसानो के लिए भी उतना ही अधिक आमदनी देने वाला फल है ।

नदियों और नहरों के किनारे मिट्टी के क्षरण को रोकने के लिए जामुन का पेड़ काफी उपयोगी है। अभी तक व्यवसायिक तौर पर योजनाबद्ध तरीके से जामुन की खेती बहुत कम देखने को मिलती हैं।

देश के अधिकांश हिस्से में अनियोजित तरीके से ही किसान इसकी खेती करते हैं।अधिकतर किसान जामुन के लाभदायक फल और बाजार के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं, शायद इसी कारणवश वो जामुन की व्यवसायिक खेती से दूर हैं।जबकि सच्चाई यह है कि जामुन के फलों को अधिकतर लोग पसंद करते हैं और इसके फल को अच्छी कीमत में बेचा जाता है।

जामुन की खेती में लाभ की असीमित संभावनाएं हैं।इसका प्रयोग दवाओं को तैयार करने में किया जाता है, साथ ही जामुन से जेली, मुरब्बा जैसी खाद्य सामग्री तैयार की जाती है।

सबसे खास बात कि जामुन हम भारतीयों की पहचान रही है अतः इस वृक्ष के संरक्षण और संवर्धन में हम सभी को अपना योगदान देना चाहिए।

Also, read this   दूध ना पचे तो यह करे उपाय।।

my Ayurvedic Youtube channel  

 

दूध ना पचे तो यह करे उपाय।।

glass, milk, white

दूध ना पचे तो यह करे उपाय।।
—————————————-glass, milk, white

 

  • दूध ना पचे तो सोंफ
  • दही ना पचे तो सोंठ
  • छाछ ना पचे तो जीरा काली मिर्च
  • अरबी व मूली ना पचे तो अजवायन
  • कड़ी ना पचे तो कड़ी पत्ता
  • तैल, घी, ना पचे तो कलौंजी
  • पनीर ना पचे तो भुना जीरा
  • भोजन ना पचे तो गर्म जल
  • केला ना पचे तो इलायची
  • ख़रबूज़ा ना पचे तो मिश्री का उपयोग करें व परिणाम देखें।😊

एक कदम स्वस्थ भारत की ओर।

 

Also, read our other articles on Ayurveda in Hindi – कान का बजना कान में आवाज आना

my ayurvedic  youtube channel

जमीन पर सोने से बीमारियाँ कैसे दूर होती हैं

आप जानिए, जमीन पर सोने से बीमारियाँ कैसे दूर होती हैं और कई वर्ष (लगभग 10-20 वर्ष ) आयु कैसे बढ़ जाती है.

आप जानिए, जमीन पर सोने से बीमारियाँ कैसे दूर होती हैं और कई वर्ष (लगभग 10-20 वर्ष ) आयु कैसे बढ़ जाती है.?

●क्या है इसका वैज्ञानिक आधार ?●

● पुराने जमाने मे ऋषि- मुनि देसीे गौवशं के गोबर एवं गोमूत्र से लीपी जमीन पर सोते थे और वो कभी भी बीमार नहीं होते थे तथा उनकी आयु भी बहुत लंबी होती थी।
● जमीन पर सोने के पीछे एक वैज्ञानिक आधार काम करता है। उसको हम गुरुत्वाकर्षण बल कहते है और शरीर में इसको अपान प्राण भी कहते हैैं।
● अपान प्राण का काम होता है शरीर को ऊर्जा के माध्यम से बॉंध कर रखना तथा शरीर के सभी ॳगो को अपनी शक्ति के अधीनस्थ रखना।
● इसी प्रकार प्रथ्वी का भी अपना एक प्राण होता है जिसको हम गुरुत्वाकर्षण बल से जानते हैं।
● प्रथ्वी हर अपनी चीज़ को अपनी तरफ खींचती है तथा अपनी गुरुत्व शक्ति से बांध कर ही रखती है।
● जब आप प्रथ्वी की सतह से ऊपर पलंग या चारपाई पर सोते है तो प्रथ्वी अपने बल के द्वारा आपको नीचे की और खींचती है तथा शरीर का अपान प्राण आपको अपनी तरफ खींचता है।
● जब हम सो जाते है तो प्रथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल और शरीर के प्राण बल के बीच बड़ी ही कशमकश और खींचतान होती है। इस खींचतान में शरीर की बहुत ज्यादा ऊर्जा की खपत होती है।
● जब सुबह हम उठते हैं तो बहुत ही थकान सी महसूस होती हैं।
● बदन में भी दर्द सा महसूस होता है चक्कर से भी आने महसूस होते हैं।
● इसके अलावा पलंग गद्दे और शरीर के बीच मे जो खाली जगह होती है जैसे गर्दन और कमर के हिस्से वहाँ पर भी खींचतान के कारण दर्द शुरू हो जाता है।
● गर्दन मे सरवाईकाल और कमर मे दर्द जिसको बैकपेन भी कहते है भयंकर रूप से शुरू हो जाता है।
● आप जमीन पर या फर्श पर सोते हैं तो आपको सर्वाइकल, कमर दर्द, चक्कर आना तथा स्लिपडिस्क जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।
● इसको आप एक उदाहरण के माध्यम से समझ सकते हैं।अगर सोते बक्त आपका हाथ पलंग या चारपाई से 2 घंटे के लिए बाहर लटक जाये तो आपका हाथ बहुत देर तक सीधा ही नहीं होता है तथा उसमें दर्द भी बना रहता है।
● इसका मुख्य कारण है कि प्रथ्वी आपके हाथ को अपनी तरफ नीचे को खींचती है तथा पलंग चारपाई उसको ऊपर रोके हुए है, इसी खींचतान में हाथ पर बहुत ही ज्यादा जौर पड़ता है।
● इसी प्रकार पूरे शरीर पर रात भर जौर पड़ता है जिससे आपका शरीर बहुत ज्यादा ऊर्जा की खपत करता है।
● अगर आप जमीन पर सो जाते हो तो आपका शरीर प्रथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल में मिल जाता है और शरीर को कोई भी ऊर्जा रात को खपत नहीं करनी पड़ती है।
● शरीर उसी प्रकार काम करता है जिस प्रकार एक कार को रात भर एसी ऑन करके छोड़ दो तो कार रात भर मे तेल भी ज्यादा खाएगी और गरम भी होगी तथा खराब भी जल्दी जल्दी होगी।
● अगर कार नॉर्मल स्टार्ट है तो न गरम होगी और न ही तेल ज्यादा खाएगी।
● इसीलिए अगर आप लंबी आयु बिना किसी बीमारी के जीना चाहते हैं तो आपको जमीन पर ही सोना चाहिए।
जमीन पर सोने से जमीन के अंदर से निकलने वाली किरणें शरीर मे होने वाले विकारो को दूर करती है।रात को जमीन से निकलने वाली चुम्बकीय किरणों से शरीर ऊर्जा लेता है तथा दिन मे सूर्य की किरणों से ऊर्जा लेता है।
● यही कारण है कि मात्र एक गिलास दूध पीकर जमीन पर पूरी रात आप चैन से सो सकते है।
● आपको भूख नहीं लगेगी जबकि पलंग या चारपाई पर भर पेट भोजन खाने के बाद भी आपको सुबह सुबह भूख लगेगी।शारीरिक श्रम मुक्त जीवनशैली में रात को भरपेट भोजन के बाद फिर सबेरे सबेरे भूख लगने पर फिर नाश्ता किया गया तो उस भोजन का पाचन नहीं होने के कारण उल्टा हरतरह की बीमारियों से ग्रस्त हो गए हैं

हमारे बड़े बुजुर्गौ और ऋषि मुनियों की परंपरागत तरीके से चलने वाली जीवनशैली अपनाए बिना हम कभी भी रोगों से मुक्त नहीं हो सकते हमारी पूरी की पूरी दिनचर्या खान-पान रहन-सहन जीवन शैली बिगड़ गई है

आइए लोटते हैं-अपनी परंपरागत जीवनशैली की और करते हैं अपने ऋषि- मुनियों के ब्रह्मवाक्य को मूर्त रूप में सक्षम और साक्षात पहला सुख निरोगी काया के आनन्द को प्राप्त होकर बीमारियों और तकलीफों से भरी जिंदगी से छुटकारा पाने के लिए संकल्पित होकर अपने घर परिवार समाज और देश को स्वस्थ रखने की और एक कदम आगे बढे।

 

कान का बजना कान में आवाज आना

VANA DEHRADUN UTTARAKHAND INDIA

vana dehradun

Vana Dehradun can be described in many words like – A luxurious Hotel, A Wellness Retreat, Ayurvedic Retreat, Rejenuvation and detoxification holidays. Vana is one of the elite property in India for the rich class.

vana dehradun
Vana Dehradun

Vana Dehradun is situated as the name suggests in Dehradun city of Uttrakhand state in north India. Which is 250km from New Delhi (capital of India).

Vana Retreat centre is surrounded by a lush green forest atmosphere with less disturbance from the outside world and situated beside Super specialist hospital- Max Hospital Dehradun which is on the main Mussoorie(Famous hill station) Highway.

vana dehradun
music in vana dehradun

Vana is designed by a Spanish architecture Esteva and it is spread over 21 acres with 66 rooms, 16 suites and 4 villas.

Types of Retreat in Vana Dehradun
  1. Ayurveda
  2. Tibetan healing
  3. yoga
  4. fitness
  5. aqua
  6. natural therapies
Property has an awesome
  • Ayurvedic Centre
  • Tibetan healing centre
  • a yoga studio and temple
  • well centre and spa
  • a private watsu pool
  • two common indoor and outdoor heated pools
  • two tennis courts.
  • own mediation and treatment centre
  • 2 in-house restaurants

Vana is very serious about our environment that’s why Vana never compromises with organic. Vana uses all bed and bath linen is 100% organic, there bottling plant saves around 1 lack plastic bottles/year and all food served is from there own farm.

Two eateries, mindful cuisine, a juice bar, more than 500 bits of craftsmanship, library, boutique, natural gardens and perspectives on the Himalayan lower regions imply that visitors approach a scope of exercises and offices to appreciate outside their retreat.

Vana is a rare gem and it is a retreat we recommend wholeheartedly for clients looking for a meaningful wellness experience. The food is outstanding, and the design is stylish and minimalist. More importantly, it has the best wellness facilities we’ve ever come across with an extensive menu of holistic treatments, highly qualified specialists and kind staff.

Vana is an uncommon diamond and it is a retreat we suggest wholeheartedly for customers searching for an important health experience. The food is remarkable, and the structure is smart and moderate. All the more significantly, it has the best wellbeing offices we’ve at any point gone over with a broad menu of comprehensive medicines, profoundly qualified masters and kind staff

Here below is the youtube channel of Vana Dehradun

Vana Dehradun original website from where you can make reservation or inquiry – VANA WEBSITE

Also, read my other article STAY IN CORBETT PARK

कान का बजना कान में आवाज आना

ear, mouth, nose

कान का बजना कान में आवाज आना

 

इसको ‘कर्ण नाद’ भी कहते हैं . कभी कभी सांय सांय की आवाज भी आती है। कानों में कभी-कभी अजीब सी आवाजें सुनाई देती हैं जैसे कि कोई कान में सीटी बजा रहा हो, बांसुरी बजा रहा हो और ऐसी बहुत सी आवाजें जो कि असल में होती नहीं है।

ये अक्सर रात को ज्यादा सुनाई देती हैं। इस रोग का सही समय पर उपचार न कराने से व्यक्ति बहरा भी हो सकता है।

*कुछ घरेलू उपाय ..*

1.बादाम के तेल की कुछ बूँदें गर्म करके कान में डालने से कान में होने वाली सांय सांय बंद हो जाती है .

2.सर्दी के कारण कान में अजीब सी आवाज होने पर सरसों के तेल को गर्म करके कान में डालने से आराम मिलता है।

3.लहसुन की 2 कलियां छिलका हटाई हुई, आक (मदार) का 1 पीला पत्ता और 10 ग्राम अजवायन को एक साथ मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें और लगभग 60 मिलीलीटर सरसों के तेल में पकाने के लिए रख दें। पकने के बाद जब सब जल जाये तो इसे आग पर से उतारकर बचे हुये तेल को छानकर शीशी में भर लें। इस तेल की 2-3 बूंदों को रोजाना 3-4 बार कान में डालने से कान का दर्द, कानों में आवाज होना और बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।

4.स्वमूत्र को गरम करके दोनों समय कान में डालने से कान का दर्द, बहना , फोड़े फुंसियाँ , कान का बजना , बहरापन सभी में बहुत फायदा होता है .

5.अगर दिमाग की दुर्बलता से यह रोग हो तो ‘बादाम रोगन’ डालें ।

6.खुश्की की वजह से ये समस्या हो तो ‘कद्दू के बीजों का तेल ‘ डालें .

7.कान में कीड़े के वजह से हो तो कैम्फर आयल डालें ।

8.अनार के ताजे पत्तों को कुचलकर निकाला हुआ रस 100 ग्राम और गौमूत्र आधा किलो और तिल का तेल 100 ग्राम तीनों को धीमी आंच पर पकाएं .

केवल तेल रह जाए तो उतार लें और शीशी में रख लें . इसकी कुछ बूँदें गर्म करके सुबह शाम डालने से कान का दर्द , कान से आवाज आना और बहरेपन में बहुत फायदा होता है।

9.प्याज के रस को गुनगुना करके कानों में 3-4 बूंदें डालने से कानों में अजीब सी आवाज सुनाई देना, कान का दर्द और कान में से मवाद बहना आदि रोग ठीक हो जाते हैं।

10.गुड़ और घी को 1 चम्मच सोंठ में मिलाकर गर्म कर लें। इसे रोजाना 2 बार खाने से कान में अजीब-अजीब सी आवाजें सुनाई देना बन्द हो जाती हैं।

11.लहसुन की 2 कलियां छिलका हटाई हुई, आक (मदार) का 1 पीला पत्ता और 10 ग्राम अजवायन को एक साथ मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें और लगभग 60 मिलीलीटर सरसों के तेल में पकाने के लिए रख दें।

पकने के बाद जब सब जल जाये तो इसे आग पर से उतारकर बचे हुये तेल को छानकर शीशी में भर लें। इस तेल की 2-3 बूंदों को रोजाना 3-4 बार कान में डालने से कान का दर्द, कानों में आवाज होना और बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।

Translate »